दुर्लभ धूमिल तेंदुआ (Clouded leopard)

डॉ बचन सिंह

निदेशक, अभिप्राय,  भूगोल संस्थान

जयपुर, 9782526093

नागालैंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पहली बार दुर्लभ धूमिल तेंदुआ (clouded leopard) दिखाई दिया है । शोधकर्ताओं की एक टीम ने नागालैंड के जनजातीय बहुल 3700 मीटर की ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्र में इसे अपने कैमरों में कैद किया है। जहां धूमिल तेंदुआ मिला है, यह इलाका भारत-म्यांमार सीमा से जुड़ा हुआ है । विश्व के कुछे इलाकों में ही इतनी ऊंचाई पर तेंदुए मिले हैं । तेंदुओं की यह प्रजाति लुप्तप्राय है, इसलिए नागालैंड के पहाड़ों में यह नजर आने पर वन्य जीव प्रेमियों को बड़ी खुशी मिली है। वन्य जीव शोधकर्ताओं ने धूमिल तेंदुओं को लेकर की गई अपनी शोध रिपोर्ट हाल ही में ‘कैट न्यूज’ के शीतकालीन अंक में प्रकाशित की है।

दुर्लभ तेंदुआ नियोफिलिस निबुलोसा वर्ग का है । यह तेंदुए की सबसे छोटी प्रजाति है । इन तेंदुओं को पेड़ों पर चढ़ने में महारथ हासिल है । आईयूसीएन(IUCN) की वन्य जीवों की सूची में यह प्रजाति लुप्तप्राय होकर खतरे में है । धूमिल तेंदुए की ताजा तस्वीरें पूर्वी नागालैंड के किफिर जिले के थानामीर गांव के जंगल में खींची गई थीं ।

ग्रामीण कहते हैं बादल वाले तेंदुए :
इन तेंदुओं को नागालैंड के ग्रामीण ‘बादल वाले तेंदुए’ या ‘खेफक’ कहते हैं। खेपक का अर्थ होता है भूरे रंग की बड़ी बिल्ली । शोधार्थियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उन्हें दो वयस्क व दो शावक तेंदुए नजर आए हैं । टीम ने माउंट सरमती की चोटी के करीब 3,700 मीटर पर पेड़ पर रखे एक कैमरे से इनकी तस्वीरों को लिया । दुर्लभ और बादल वाले तेंदुओं के बारे में कहा गया है कि नागालैंड में इनकी आबादी अब बढ़ सकती है।

बता दें, इस दुर्लभ तेंदुए को आईयूसीएन (IUCN) रेड लिस्ट ऑफ थ्रेटड स्पीशीज के तहत ‘असुरक्षित’ (आसान शिकार) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, क्लाउडेड लेपर्ड बड़े पैमाने पर कम ऊंचाई वाले सदाबहार वर्षावनों में रहने के लिए जाने जाते हैं, इसलिए उन पर नजर रखना जरूरी है ।

अतिरिक्त फ़ैक्ट

सारामती चोटी :

उत्तरी-पूर्वी हिमालय या पूर्वाञ्चल की सबसे ऊंची चोटी है । इसकी समुद्र तल से ऊँचाई 3826 मीटर है । भारत – म्यांमार सीमा के निकट स्थित है । यहाँ सर्दी में चोटी पर बर्फ जम जाती है । यहाँ से लिकीमरो नदी का उद्भव होता है ।

स्रोत : विभिन्न अखबारों से ।