जीवन की भौतिक गुणवत्ता सूचकांक (PQLI)

Dr. Bachan Singh, Director

The Institute of Geography

Near Riddhi Siddhi Jaipur, 9782526093

www.abhiprayjaipur.in

Abhipray App

 

राष्ट्रीय आय तथा प्रति व्यक्ति आये में वृद्धि जैसे मापकों की कमियों के कारण ये आर्थिक विकास के वास्तविक संकेतक नहीं माने जाते । किसी भी देश की विकास प्रक्रिया में सभी नागरिकों का शामिल होना बुनियादी आवश्यकता माना जाता है । इसी को ध्यान में रखते हुए मॉरिस डेविस मॉरिस ने ’जीवन की भौतिक गुणवत्ता सूचकांक’ (Physical Quality of Life) का प्रतिपादन किया।

इस सूचकांक के अंतर्गत  मानव जीवन की भौतिक गुणवतत्ता में सुधार को आर्थिक विकास का पैमाना माना जाता है । जीवन की भौतिक गुणवत्ता का स्तर किसी भी समुदाय के आर्थिक विकास के स्तर को निर्धारित करता है । यदि किसी देश का भौतिक जीवन स्तर दूसरे देश की तुलना में बेहतर है, तो वह दशा अधिक विकसित माना जाता है। भौतिक गुणवत्ता को मापने के लिए तीन मानकों का प्रयोग किया जाता हैः

  1. शिक्षा का विस्तार
  2. जीवन प्रत्याशा और
  3. शिशु मृत्यु दर

सीमाएं:

  • इस प्रकार के सूचकांक में शामिल किए जाने वाले मदों की संख्या और प्रकार के संदर्भ में अर्थशास्त्री एकमत नहीं हैं ।
  • जीवन की भौतिक गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं । उदाहरण के लिए – रोजगार, आवास, न्याय तथा सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ मानवाधिकार । यह साक्षरता दर, शिशु मृत्यु दर और जीवन प्रत्याशा दर का एक साधारण औसत है ।
  • इस सूचकांक में सभी कारकों को समान भारित प्रदान किया जाता है, हालाँकि सभी कारकों को समान महत्त्व देने के पीछे के तर्क को समझाना कठिन है ।
  • यह सूचकांक किसी देश की अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तन की व्यख्या नहीं करता है । साथ ही, यह आर्थिक या मौद्रिक अवधारणा पर भी विचार नहीं करता है।
  • इसलिए यह आर्थिक विकास के साथ-साथ आर्थिक वृद्धि का उपयुक्त मापन नहीं हैं ।

मानव विकास सूचकांक (PQLI):

मानव विकास सूचकांक पाकिस्तानी अर्थशास्त्रर महबूब-उल-हक द्वारा विकसित मानव विकास के मापक का एक सांख्यिकीय उपाय है । इस बाद में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा देशों के विकास के स्तर को मापने के लिए अपनाया गया ।

एचडीआई जीवन प्रत्याशा, साक्षरता दर (शिक्षा) और प्रतिव्यक्ति आय जैसे कुछ मापदंडों के आधार पर किसी देशा के विकास को मापता है । यूएनडीपी ऊपर वर्णित मापदंडों पर दुनिया के देशों का आकलन करके एक वाषिक रिपोर्ट जारी करता है। इसे राष्ट्र के विकास के सर्वोत्तम संकेतकों में से एक माना जाता है क्योंकि इसमें आर्थिक विकास को निर्धारित करने के लिए आवश्यक सभी महत्त्वपूर्ण संकेतक शामिल होते है ।

डॉ महबूब उल-हक और प्रो. अमर्त्य सेन घनिष्ट मित्र थे और डॉ. हक के नेतृत्व में दोनों ने आरंभिक ‘मानव विकास प्रतिवेदन’ निकालने के लिए कार्य किया था। इन दोनों दक्षिण एशियाई अर्थशास्त्रियों में विकास के वैकल्पिक विचार का प्रतिपादन किया । अंतर्दृष्टि और करुणा से ओत-प्रोत पाकिस्तानी अर्थशास्त्री डी. महबूब-उल-हक ने 1990 ई. में मानव विकास सूचकांक निर्मित किया । उनके अनुसार विकास का संबंध लोगों के विकल्पों में बढ़ोतरी से है ताकि वे आत्मसम्मान के साथ दीर्घ और स्वस्थ जीवन जी सके । 1990 ई. से संयुक्त कार्यक्रम ने वार्षिक मानव विकास प्रतिवेदन प्रकाशित करने के लिए जिनकी मानव विकास की संकल्पना का प्रयोग किया है।

डॉ. हक के मस्तिष्क को लोच और एक दायरे से बाहर सोचने की उनकी योग्यता उनके भाषणों में से एक भाषण से चित्रित की जा सकती है जिसका उद्धरण देते हुए उन्होंने कहा आज जो वस्तुएँ हैं उन्हें देखते हो और पूछते हो क्यों ? मैं उन वस्तुओं का स्वप्न लेता हूँ जो कभी नहीं थी और पूछता हूँ ये क्यों नहीं है?

नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने विकास का मुख्य ध्येय स्वतंत्रता में वृद्धि (अथवा परतंत्रता में कमों) के रूप में देखा । रूचिकर बात यह है कि स्वतंत्रताओं में वृद्धि भी विकास लाने वाला सर्वाधिक प्रभावशाली माध्यम है। उनका कार्य स्वतंत्रता की वृद्धि में सामाजिक और संस्थाओं तथा प्रक्रियाओं की भूमिका का अन्वेषण करता है ।

इन अर्थशास्त्रियों का कार्य मील का पत्थर है जो लोगों को विकास पर होने वाली किसी भी चर्चा के केंद्र में लाने में सफल हुए है।

मानव विकास के उपागमः (4)

  • आय उपागमः  यह पउगम मानव विकास के सबसे पुराने उपागमों में से एक है। मालनव विकास को आय का स्तर किसील भी व्यक्ति की स्वतंत्रता के स्तर को प्रदर्शित करता है। आय का स्तर जितना अधिक होता है, मानव विकास का स्तर उतना ही अधिक होता है।
  • कल्याण उपागमः यह उपागम मनुष्य को सभी विकासात्मक गतिविधियों के लाभर्थी अथवा लक्ष्य के रूप में देखता है। इस उपागम के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर सरकारी खर्च में वृद्धि करके मानव विकास के स्तर को बढ़ा सकती है।
  • बुनियरादी आवश्यकता उपागमः यह दृष्टिकोण आरंभ में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा प्रस्तावितकिया गया था। इसके अंतर्गत 6 बुनियादी आवश्यकताओं – स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन, पानी की आपूर्ति, स्वाच्छता और आवास की पहचान की गई है। यह उपागम विशिष्ट वर्गों की बुनियादी आवश्यकताओं के प्रावधान पर बल देता है।
  • क्षमता उपागमः इस उपागम का संबंध  प्रोफेसर अमर्त्य सेन से है। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और संसाधनों तक पंहुच को मानव क्षमताओं के निर्माण तथा मानव विकास में वृद्धि की कुंजी माना जाता है।

सीमाएँ-

  • मानव विकास सूचकांक के आधार पर एचडीआई स्कोर अलग-अलग देशों के लिए अलग-अलग होते हैं। इतना ही नहीं एक देशा ही के विभिन्न भागों में भी अंतर देखने को मिलता है, जिसके परिणामस्वरूप देशों के भीतर व्यापक असमानता दिखाई देती है।
  • एचडीआई अधिकांश लोगों की जीवन प्रत्याशा जैसे दीर्घकालिक को शामिल नहीं किया जाता ।
  • एचडीआई, आर्थिक कत्याण और विकास को मापते समय लैंगिक समानता, मृत्यु दर, गरीबों और धन वितरण जैसे अन्य कारकों को ध्यान में नहीं रखता ।
  • प्रत्येक दशा तथा स्थान के संदर्भ में देखा जाए तो स्वास्थ्य एवं जीवन प्रत्याशा तथा शिक्षा के स्तर को मापने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं, इस प्रकार कुछ चुने हुए उपायों को सार्वभौमिक रूप से लागू करना उचित प्रतीत नहीं होता ।

मानव विकास सूचकांक 2020 संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट है । 2020 में, UNDP ने ग्रहीय दबाव-समायोजित मानव विकास सूचकांक जारी किया है । इसका मतलब है कि मानक मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) एक देश के प्रति व्यक्ति कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन और भौतिक पदचिह्न द्वारा समायोजित किया जाता है ।

मानव विकास सूचकांक (HDI) क्या है ?

यह एक संयुक्त सूचकांक है जो मानव विकास के तीन बुनियादी आयामों में औसत उपलब्धि को मापता है – एक लंबा और स्वस्थ जीवन, ज्ञान और एक सभ्य जीवन स्तर ।

1- लंबा और स्वस्थ जीवन: रिपोर्ट में भारतीयों के लिए जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 69.7 वर्ष है । यह दक्षिण एशियाई औसत 69.9 साल से थोड़ा कम है । साथ ही, 1990 और 2019 के बीच, जन्म के समय भारत की जीवन प्रत्याशा में 11.8 वर्ष की वृद्धि हुई ।

2- ज्ञान: रिपोर्ट में भारत में स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्ष 12.2 वर्ष थे । साथ ही, 1990 और 2019 के बीच, भारत के स्कूली शिक्षा के वर्षों में 3.5 साल की वृद्धि हुई, और स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्षों में 4.5 साल की वृद्धि हुई ।

3- जीवन स्तर: भारत की सकल राष्ट्रीय आय (GNI) प्रति व्यक्ति USD 6,681 है जो 1990 और 2019 के बीच लगभग 273.9% की वृद्धि हुई है ।

2020 मानव विकास रिपोर्ट की संरचना

1- एंथ्रोपोसीन के लिए मानव विकास का नवीनीकरण ।

2- क्रिया को उत्प्रेरित करने के लिए परिवर्तन के तंत्र ।

3- नए मेट्रिक्स की खोज ।

मानव विकास सूचकांक 2020:

भारत मध्यम मानव विकास श्रेणी में 0.645 के एचडीआई मूल्य के साथ गिरते हुए, सूचकांक में 189 देशों में से 131 वें स्थान पर है । वर्ष 2019 में भारत 129वें स्थान पर था ।

उल्लेखनीय है कि 1990 और 2019 के बीच भारत का एचडीआई मूल्य 0.429 से बढ़कर 0.645 हो गया, जो 50.3% की वृद्धि है ।

अन्य सूचकांक और भारत का प्रदर्शन  — इंडेक्स वैल्यू (भारत का प्रदर्शन)

असमानता-समायोजित मानव विकास सूचकांक (IHDI) 0.475
 लिंग विकास सूचकांक (GDI) 0.820
लैंगिक असमानता सूचकांक (GII) 0.488
बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) 0.123