ला नीना, जलवायु परिवर्तन और भारत

डॉ बचन सिंह

निदेशक, अभिप्राय

भूगोल संस्थान, जयपुर ।

 

WMO का बड़ा खुलासा: ला नीना का जलवायु परिवर्तन से कोई सरोकार नहीं है, केवल तापमान और वर्षा को प्रभावित करता है ।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने यह कहा कि, ला नीना लगातार दूसरे वर्ष सक्रिय हुआ है, जो तापमान और वर्षा को प्रभावित करता है और वर्ष 2022 की शुरुआत तक इसके कायम रहने की उम्मीद है ।  हालांकि इसका जलवायु परिवर्तन पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

WMO की प्रेस विज्ञप्ति:

WMO ने अपनी एक प्रेस विज्ञप्ति में यह कहा है कि, “स्वाभाविक रूप से होने वाली इस जलवायु घटना के शीतलन प्रभाव के बावजूद, दुनिया के कई हिस्सों में तापमान औसत से ऊपर रहने की उम्मीद है क्योंकि ग्रीनहाउस गैसों के रिकॉर्ड उच्च स्तर के परिणामस्वरूप वातावरण में गर्मी संचित है । ”

उत्तर-पश्चिमी उत्तरी अमेरिका, भारतीय उपमहाद्वीप, इंडोचाइनीज प्रायद्वीप और ऑस्ट्रेलिया के बड़े अपवादों के साथ, कई भूमि क्षेत्रों में औसत तापमान से ऊपर तापमान रहने की उम्मीद जताई गई है । हालांकि  इससे कृषि, स्वास्थ्य, जल संसाधन और आपदा प्रबंधन जैसे जलवायु-संवेदनशील क्षेत्र प्रभावित होंगे ।

वर्ष 2020/ 2021 में ला नीना का ठंडा प्रभाव :

WMO के महासचिव प्रोफेसर पेटेरी तालास ने यह कहा कि, “वर्ष, 2020/ 2021 में ला नीना का ठंडा प्रभाव – जिसे आमतौर पर ला नीना के दूसरे भाग में महसूस किया जाता है – इसका मतलब है कि वर्ष, 2021 सबसे गर्म वर्ष के बजाय रिकॉर्ड पर दसवें सबसे गर्म वर्षों में से एक होगा. यह एक अल्पकालिक राहत है और दीर्घकालिक वार्मिंग प्रवृत्ति को उलट/ बदल नहीं सकती है या जलवायु कार्रवाई की तात्कालिकता को कम नहीं करती है । ”

ला नीना का तात्पर्य मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान के बड़े पैमाने पर ठंडा होने से है, जो उष्णकटिबंधीय वायुमंडलीय परिसंचरण में होने वाले परिवर्तन अर्थात् हवाओं, दबाव और वर्षा के साथ युग्मित है ।  यह आमतौर पर अल नीनो के रूप में मौसम और जलवायु पर विपरीत प्रभाव डालता है, जो अल नीनो दक्षिणी दोलन (ENSO) का गर्म चरण है.

यह ENSO स्वाभाविक रूप से होने वाली जलवायु परिवर्तनशीलता का प्रमुख चालक है और मौसमी जलवायु पूर्वानुमान का मुख्य स्रोत भी है ।  इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (AR6 WRI) की नवीनतम आकलन रिपोर्ट के अनुसार, इस गर्म होती दुनिया/ पृथ्वी में, क्षेत्रीय पैमानों पर संबंधित ENSO वर्षा परिवर्तनशीलता तेज होने की संभावना है.

अल नीनो और ला नीना एकमात्र कारक नहीं हैं और कोई भी दो ला नीना या अल नीनो घटनायें एक-समान नहीं हैं । इसलिए WMO अब निर्णय लेने वालों को अतिरिक्त कार्रवाई योग्य जानकारी प्रदान करने के लिए मासिक वैश्विक मौसमी जलवायु update / अद्यतन (GSCU) जारी करता है ।

नवीनतम WMO अपडेट के अनुसार, वर्ष, 2021 के अंत तक ला नीना के स्तर पर उष्णकटिबंधीय प्रशांत समुद्री सतह का उच्च तापमान (90 प्रतिशत) तक बने रहने की संभावना है, और वर्ष, 2022 की पहली तिमाही तक ला नीना के स्तर पर यह तापमान मध्यम स्तर (70-80 प्रतिशत) पर बने रहने की संभावना है ।  यह अपडेट WMO के लंबी दूरी के पूर्वानुमान और विशेषज्ञ व्याख्या के ग्लोबल प्रोडक्शन सेंटर के पूर्वानुमानों पर आधारित है ।

WMO का बड़ा बयान:

10 वर्षों के भीतर दो गुना बढ़ गया विश्व में समुद्र का स्तर । वर्ष, 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन तक पहुंचेगा भारत; उद्योग स्थिरता पर भी देना होगा ध्यान ।

अतिरिक्त फ़ैक्ट :

WMO हैड्क्वार्टर  :  जेनेवा, स्विटजरलंड

WMO की स्थापना : 23 मार्च 1950

ला नीना : ठंठी जल धारा

अल निनो : गरम जल धारा

ला नीना  & अल निनो : प्रशांत महासागरीय धरातल पर चलती है ।

ENSO: El NINO एवं दक्षिणी दोलन का संयुक्त प्रभाव, यह घटना भी भारतीय मानसून को प्रभावित करती है ।

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